
अंतरराष्ट्रीय MSME दिवस 2026: आज 27 जून को पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) दिवस मनाया जा रहा है. इस वर्ष का विषय “नवाचार और सतत औद्योगिक विकास के माध्यम से लघु एवं मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाना” रखा गया है. इसका उद्देश्य छोटे व्यवसायों को आधुनिक तकनीक, डिजिटल नवाचार, हरित विकास और आसान वित्तीय सहायता से जोड़कर मजबूत अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है.
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) दुनिया के 90 प्रतिशत से अधिक व्यवसायों का प्रतिनिधित्व करते हैं. यही क्षेत्र रोजगार, आय और स्थानीय आर्थिक विकास का प्रमुख आधार है. विशेष रूप से महिलाएं, युवा और ग्रामीण क्षेत्रों के उद्यमी बड़ी संख्या में इसी क्षेत्र पर निर्भर हैं. भारत में भी एमएसएमई अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ है और विनिर्माण, निर्यात तथा रोजगार सृजन में इसकी बड़ी भूमिका है.
हालांकि, आज के समय में छोटे उद्यमों के सामने कई चुनौतियां भी हैं. अधिकांश कारोबारियों को समय पर बैंक ऋण नहीं मिल पाने से वो या तो व्यवसाय बंद कर देते हैं या अच्छे तरीके से उसको आगे नहीं बढ़ा पाते हैं. भारत में ग्रामीण इलाकों में सरकारी योजनाओं का लाभ, बैंकिंग सुविधाओं और कानूनी संरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल पाने से अपना खुद का व्यवसाय भी शुरू नहीं कर पाते हैं. जिनका थोड़ा बहुत चल भी रहा है उनको बढ़ती लागत, वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और डिजिटल बदलाव जैसी चुनौतियों ने भी दबाव डाला है.
इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने कई सरकारी योजनाएं पहले से और समय समय पर शुरू करती रहती है. आज हम अंतरराष्ट्रीय MSME दिवस पर उन्हीं सरकारी योजनाओं के बारे में जानेंगे, जिससे हम लाभ लेकर अपना व्यवसाय शुरू कर सकें.
छोटे कारोबार शुरू करने में मदद कर रही हैं ये सरकारी योजनाएं
सरकार के तरफ से व्यसाय करने के लिए कई सारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है.
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP): इस योजना के तहत नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने के लिए बैंक ऋण पर सरकारी सब्सिडी दी जाती है. यह योजना स्वरोजगार शुरू करने के इच्छुक युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण व्यसायियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है.
पीएम विश्वकर्मा योजना : यह योजना पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए शुरू की गई है. इसके तहत बढ़ई, लोहार, दर्जी, कुम्हार, सुनार, मोची सहित 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट, डिजिटल भुगतान से जोड़ने, विपणन सहायता और बिना जमानत ऋण की सुविधा दी जाती है.
मुद्रा योजना (PM Mudra Yojana): इस योजना के माध्यम से छोटे कारोबारियों को शिशु, किशोर और तरुण श्रेणियों में बिना संपार्श्विक (Collateral) के लोन दिया जाता है. यह योजना नए व्यवसाय शुरू करने और पुराने कारोबार का विस्तार करने वालों के लिए उपयोगी है.
स्टैंड-अप इंडिया योजना: इस योजना के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला उद्यमियों को नया उद्यम शुरू करने के लिए बैंक से लोन दिया जाता है.